Be Irresistible, Click Here Bareilly UP; I LOVE MUHAMMAD vs I LOVE MAHADEV | Face to Face #rizwanahmed #Bareilly #ILoveMuhammad ... ...
Bareilly UP; I LOVE MUHAMMAD vs I LOVE MAHADEV | Face to Face #rizwanahmed #Bareilly #ILoveMuhammad ...
[संगीत] हेलो नमस्कार सत श्री अकाल अस्सलाम वालेकुम कैसे हैं जनाब तो आई लव मोहम्मद की बात जो कानपुर की एक गली से शुरू हुई थी और मानो ऐसा बना दिया गया कि पूरे हिंदुस्तान में अब इस्लाम खतरे में है और इस्लाम पर आक्रमण हो रहा है हिंदुत्व ताकतों का वो जुमे मुबारक के दिन कुछ ना कुछ जरूर होना था क्योंकि जुमे मुबार मुबारक के दिन हम लोगों की जो ईमान की ऊर्जा है वो ज्यादा प्रबल होती है और साथ-साथ भीड़ भी ज्यादा होती है। भीड़ ज्यादा होती है तो उनको खदेड़ के एक तरफ ले जाना भी आसान होता है। उसी में कोई पत्थर चला देता है। उसी में भीड़ भी पत्थर चला देती है। भीड़ पत्थर चला देती है तो लाठी डंडा गोली चलती है। कोई मरमरा जाए तो और फायदा हो जाता है। और मजा आता है। तो इस मारे जुम्मे के दिन मुझे यकीन था कहीं ना कहीं कुछ होगा शुरू और वो हो गया बरेली में कहीं गुजरात में भी खबर आई थी एक मध्य प्रदेश से आई थी पर वो इतने बड़े बवाल नहीं थे उसके बाद पुलिस ने द लाठी द डंडा दे लाठी द डंडा ले द लाठी द डंडा उसके बाद कहीं-कहीं से खबर आई कि आई लव महादेव भी शुरू हो गया देखिए आप आई लव महादेव ना करिए अगर आप आई लव मोहम्मद के जवाब में कर रहे हैं। इसका कारण ये है कि ये चीज़ को समझना इस चीज़ को हराना इस चीज़ को सॉर्ट आउट करना एक अलग ही चीज है जो मैं बहुत दिन से समझा रहा हूं। लेकिन सरकार आ समझने को तैयार नहीं है या समझना चाहती नहीं है। अपने वीडियो के एंड में शायद बंद लिफाफे में कुछ बोल के निकल लूंगा बदली गली से। तो साहब ये लाठी डंडे चले। बहुत लोग गिरफ्तार हुए। अब शायद बुलडोजर भी चलेंगे। देखिए दो तीन बातें हैं मेरे हिसाब से एज ए सोशियो रिलीजियस कमेंटेटर। एक बात तो ये है इस तरह के बवाल में इस तरह केस में इस तरह का गुंबा चलाने में इस तरह से लाठी खाने में शायद हम लोगों को मजा आने लगा है। शायद ये एक पॉइंट ऑफ व्यू है मेरा। मैं ये नहीं कह रहा कि मैं करेक्ट ही हूं। शायद मजा आने लगा है। नपुर शर्मा वाला मामला हुआ था। चलिए आपने विरोध किया। मैं तो बड़ा न्यूट्रल आदमी हूं। लेकिन नहीं साहब विरोध इतना नहीं होगा। विरोध बढ़ता जाएगा बढ़ता जाएगा। उसे उस चरम तक ले जाएंगे। छोटे में सॉर्ट आउट करके नहीं छोड़ेंगे। इसी तरह आइलम मोहम्मद की बात हो गई। नहीं साहब विरोध हुआ कानपुर में। चलिए कुछ हुआ पकड़े गए छोड़े गए। नहीं साहब पूरे देश में करना है। करना है। करना है। क्यों पैदा करना है। इसको आगे उस अंजाम तक ले जाना है। पता नहीं अल्लाह जाने वो अंजाम क्या है। क्यों कह रहा हूं अभी आप लोगों को बताता हूं। तो एक तो यह रीजन मुझे लगता है या दूसरा ये रीजन ये है कि मुस्लिम्स को हम मुसलमानों को बड़ी जिम्मेदारी से बता रहा हूं। ये चीज समझ में आ गई है कि अपनी जगह बनाए रहना, अपनी जगह में आगे बढ़ना, कुछ और पावरफुल होना, धीरे-धीरे अंदर लड़ते रहना और जीतते रहना का तरीका यही है। और इसी तरीके से जितना भी इस्लाम आगे जाकर फैला है, उसमें ये भी एक तरीका था जरूर कि लड़ते रहो, झूझते रहो, लड़ते रहो, झूझते रहो। कहीं ना कहीं जाकर तुमको कामयाबी मिलेगी। या यह दूसरा रीज़न है जिस रीज़न के वजह से एक छोटे से तिल का ताड़ बना दिया जाता है। राई का पहाड़ बना दिया जाता है। कि लगता है कि इसी तरह के संघर्ष से हमारा वजूद भी जिंदा रहेगा, पहचान भी जिंदा रहेगी। हमारी नॉनसेंस या नॉन नॉनसेंस वैल्यू भी जिंदा रहेगी और हमारा वर्चस्व बढ़ता रहेगा। और एक दिन हम उस सोसाइटी को इसी दम पर आगे जाकर कभी कैप्चर कर सकते हैं। जिस तरह हमने पहले किया है, जिस तरह अब यूरोप से खबरें आ रही है, हमने किया है। बड़ी इंटरेस्टिंग चीजें अभी आप लोगों को दिखाने जा रहा हूं। जैसे एक मिशिगन का एग्जांपल देखिए। यूएसए में मिशिगन सिटी के मेयर ने जो एक लेबनीज़ है, उसने एक स्ट्रीट का नाम एक हिजबुल्ला फाइटर के नाम पर रख दिया। अब ये अमेरिका का अमेरिका का एक तरह से मेयर का कोर्ट रूम चल रहा है। एक बंदा वहां पर इस बात का विरोध करने पहुंचता है कि आपने उस तरह उस ऑर्गेनाइजेशन के आदमी के नाम पर एक मिशिगन में स्ट्रीट का नाम रख दिया है जिसने अमेरिका के खिलाफ जंग छेड़ी। सुनिए अमेरिका में बैठ के मिशगन का मेयर उस अमेरिकन वाइट अमेरिकन से क्या बोल रहा है? आई मीन द्बसी मेनी अमेरिक जस्ट सिटी [संगीत] बिकॉज़ यू आर समिन अमेरिका में वाइट बैठ के बोल रहा है उसको मिगन का मुस्लिम मेयर बोल रहा है कि यू आर इस्लामोफोबिक। दिस यू डोंट डिर्व टू बी इन सिटी। और जिस दिन तुम शहर छोड़ के जाओगे मैं यहां पे सेलिब्रिटी परेड निकलवाऊंगा। बिकॉज़ यू आर इस्लामोफोबिक। कैप्चर हुआ ना? कभी ये भी बॉर्डर पर हाथ जोड़कर आया होगा ना? या इसके मां-बाप किसी बॉर्डर पर हाथ जोड़ के अंदर आए होंगे ना। कैप्चर हुआ ना? एक वहां की कांग्रेसमैन है अमेरिका की। उसका नाम है इल्हा उमर। सोमालीज़ है। आप लोगों ने उसको कहीं देखा जरूर होगा। जरा उसका एक बात सुनिए कि जब उसकी कैंपेन चल रही थी तो मेनोपोलिस एक जगह है जहां पर सोमालीस का कंसंट्रेशन ज्यादा है। वहां पर उसकी जो कैंपेन लड़ी जा रही थी उसमें सोमालीस क्या बोल रहे थे? गदियत इहान मादियत इहान गदियत गदियत गदियत गदियत जी हां साथियों नीचे आपने सबटाइटल्स देखे हैं इंग्लिश में कि इलाहा उमर के ये कैंपेन का टाइम का वीडियो निकाल के लाया हूं उसके प्रमोटर्स ये कह रहे हैं कि इलाहा उमर को इला उमर से कोई मतलब नहीं। इला उमर को मेनोपोलिस से कोई मतलब नहीं। इला उमर को अमेरिका से कोई मतलब नहीं। इला उमर को सोमालिया और सोलिया के हितों से मतलब है। जीतने के बाद इला उमर क्या बोल रही है? जरा ये सुन लीजिए। हे एवरीवन लास्ट अपडेट आफ्टर नियरली 30 आवर्सिंग ऑन फाइनली ऑन द बिग डिजास्टब्लिक। वी नो दिस इज गोइंग टू हैव इंपैक्ट ऑन आवर कंट्री दिस इज द बिगिनिंग ऑफ़ अमेरिकन डिक्लाइन लेकिन कमिंग बैक टू द डॉक्ट्रिन टू द विचारधारा जो डीएनए है जो सोच है आपने कोई भी जवाब दिया लेकिन एंड में तो इला उमर लड़ते लड़ते कुछ करते आपके कांग्रेस हाउस तक पहुंची आपके कांग्रेस तक पहुंची ना उसने कैंपेन में ये कहा ना कि मुझे अमेरिका से कोई मतलब नहीं है हमको सोमालिया से मतलब उसको जो कैंपेन लेकर चल रहे थे। तो नाउ कमिंग टू द पॉइंट जो मुझे लगता है दो रीजन एक रीजन है कि इस तरह का पर्सिस्टेंट रहना कंसिस्टेंट रहना लड़ते रहना लड़ते रहना झूझते रहना तिलका ताड़ बनाते रहना या ये रीजन है कोई और काम नहीं है कोई और अच्छी पहचान बनाने का तरीका नहीं है कोई कंस्ट्रक्टिव कंट्रीब्यूशन नहीं है तो इसी तरह से अपनी पहचान बनाओ और इसी केस में इसी लाठी खाने गाली खाने गाली देने में लाठी मारने में खाने में मजा आता है। ये एक सिंपल सा रीज़ हो सकता है। दूसरा यह है कि इसी तरह के नेचर की वजह से कामयाबियां मिलती आई हैं। पहले भी मिली हैं और अब भी मिल रही हैं। फिलहाल अमेरिका में मिल रही है। कितना बड़ा आपको एग्जांपल दिखाया एला उमर का और यू लंदन में मिल रही हैं। कितना बढ़िया एग्जांपल दिखाया आपको वहां का मेयर का सादिक का वह और जो आप लोग को पता होगा मेनोपॉलिस का दिखाया मिशिकंद का दिखाया वहां मिल रही हैं। तो शायद इस सोसाइटी में भी अभी भी लड़ते रहो, लड़ते रहो, लड़ते रहो। शायद यहां पर भी एक दिन जाकर कामयाबी मिल मिलेगी। पहले मिली 1000 साल पहले मिली। 8500 साल पहले मिली। 1947 में विभाजन के बाद मिली। तो या तो यही तरीका है और इसी से कोई रास्ता निकलेगा। पानी यहीं से निकलेगा। इसी तरह से एड़ी रगड़ते रहो जो माना जाता है हम लोगों में। और यहां एक दिन आपको इंशाल्लाह ताला ये लाठी डंडे खा के कामयाबी मिलेगी। और वो कामयाबी कोई कंट्रीब्यूशन की नहीं होगी। वो सिर्फ पावर को पकड़ने की होगी। अपना वर्चस्व अपनी दबंगई बनाने की होगी। तो ये दो ही थ्योरी हैं जो मुझे लगता है कि इन दोनों में से कोई एक चीज है जिस वजह से हम लोग इस तरह से ओवर रिएक्शन बाय रिएक्ट बार-बार ओवर रिएक्ट मिल करते हैं। लेकिन कुछ लोगों को कुछ देश दुनिया में कुछ सरकारों को इन चीजों को हैंडल करना आता है प्रॉपर्ली। उनमें इतना मादा इतना गुदा है। कुछ सरकारों में इतना गुदा और इतना मादा नहीं है कि इस तरह के जैसे बरेली में हुआ वो जो प्रवोकेशन हुआ जिसने प्रवोक किया पता नहीं एक आदमी तो शुरू में मैंने बोला था एक बंद लिफाफे में बाल बोध बात बोल के पतली गली से निकल लूंगा। एक आदमी ने इसी तरह प्रवोक किया था तो वो फिलहाल डिब्रूगंज जेल में है। एक ने प्रवोक किया था फिलहाल वो राजस्थान की जोधपुर जेल में है। पता नहीं तौकीर रजा आज तक किसी जेल में क्यों नहीं है। डिब्रूगंज क्यों नहीं है? निकोबार इंडोकार निकोबार क्यों नहीं है? कोची क्यों नहीं है? इस पर भी एक चिंतन होना चाहिए। या सरकार जानती है कि इनको किसी इंटरनेशनल डिप्लोमेसी की वजह से, मिडिल ईस्ट वजह से, ऑयल के वजह से वगैरह-वगैरह इन लोगों को हम हैंडल ही नहीं कर सकते। इनसे डरती है या जानबूझ के इनको खुला जोड़ छोड़ रखा है। पता है ना डिब्रूगंज जेल में कौन है और जोधपुर जेल में कौन है? जय हिंद वंदे मातरम। खुदा हाफिज। लेकिन तौकीर रजा अपने घर में है। ...